जानिए एकादशी व्रत का चमत्कारिक महत्व और पापों से मुक्ति का रास्ता

एकादशी का व्रत हिंदू धर्म में अत्यधिक महत्व रखता है। इसके महत्व का आंकलन करना है तो हिंदू धर्म में सबसे बड़ा पाप माना जाता है ब्राह्मण हत्या को। इस व्रत को करने पर उस पाप से भी मुक्ति पाई जा सकती है।

यह व्रत मुख्यता जग के पालनकर्ता भगवान विष्णु को समर्पित है और इस दिन उनकी पूजा अर्चना की जाती है। यह प्रत्येक वर्ष हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण मास की 11वीं तिथि को मनाई जाती है। इस वर्ष यह अवसर 13 जुलाई को है, अर्थात इस वर्ष 13 जुलाई को एकादशी पर्व मनाया जाएगा।

एकादशी व्रत की प्रकृति

एकादशी व्रत चूंकि जग के पालनकर्ता भगवान विष्णु को समर्पित है, इसलिए इस व्रत को बड़ा विशेष स्थान प्राप्त है।

इस व्रत का विधि-पूर्वक पालन करने वाले की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और वह सभी पापों से मुक्ति प्राप्त कर लेता है। इस व्रत के पीछे यूं तो बहुत सी पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं,

चाहे वो भगवान विष्णु द्वारा पांडवों को यह कथा सुनाने की हो, या फिर स्वर्ग में युधिष्ठिर को देवताओं द्वारा इस कथा को सुनाने की हो, एक ब्राह्मण और जमींदार की कथा भी प्रचलित है।

कथाएं जितनी भी हों, लेकिन केंद्रीय भावना यही है कि जो भी इस व्रत का विधिपूर्वक पालन करता है, उसके कष्टों का निवारण होता है, उसे अपने पापों से छुटकारा मिलता है और साथ ही साथ उसी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

एकादशी व्रत के नियम विधान:

एकदशी के दिन इस पर्व की शुरुआत प्रातः स्नान करके अपने देवालय को साफ सफाई करने से होती है। इसके पश्चात एक लकड़ी के पीछे भगवान विष्णु की कोई प्रतिमा या किसी प्रतिरूप को तुलसी पत्तों, फूलों और पीले वस्त्रों से सजाया जाता है।

भोग में फल और चनामृत के साथ सामर्थ्य अनुसार चढ़ावा चढ़ाया जाता है और फिर किसी कथा वाचक को बुलाकर सभी संबंधित और परिचित लोगों को आमंत्रित करके सभी के साथ कथा सुनाई जाती है। इस क्रिया में कथा वाचक, कथा सु

नने वाले और कथा की व्यवस्था कराने वाले सभी को लाभ होता है। इन सभी क्रियाओं के उपरान्त प्रसाद वितरण किया जाता है और सभी के मंगल की कामना की जाती है।

उसके बाद जो भी व्रती या व्रत करने वाले होते हैं, वो एकादशी के सम्पूर्ण काल में उपवास रखते हैं।

एकादशी व्रत के दौरान आहार:

एकादशी व्रत के दौरान व्रती द्वारा अनाज का सेवन नहीं किया जाता, केवल फल, दूध और दही का सेवन किया जा सकता है। कुछ व्रती इसके निर्जला व्रत भी करते हैं,

जो सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। सात्विक आहार से वैज्ञानिक रूप से भी बहुत से लाभ होते हैं।

आध्यात्मिक रूप में अगर देखें तो इस व्रत में सात्विक आहार या निर्जला का पालन करने पर आत्मा की शुद्धि भी होती है।

एकादशी व्रत का आध्यात्मिक महत्व:

यह एकादशी का व्रत चूंकि सावन के माह में पड़ता है, जो भगवान शिव को समर्पित है। शिव इस जग के संहारक हैं, लेकिन यह पर्व भगवान विष्णु को समर्पित है, जो इस जग के पालन करता है।

इस पालनकर्ता और संहारक का यह अद्भुत समन्वय केवल इसी पर्व में दिखाई पड़ता है, जो अपने में एक बहुत विशेष महत्व रखता है।

प्रमुख मुहूर्त:

इस वर्ष एकादशी का समय काल 12 जुलाई को संध्या 5:59 से लेकर 13 जुलाई संध्या 6:15 तक है। व्रती के लिए व्रत समाप्त करने के लिए सबसे शुभ मुहूर्त 14 जुलाई को प्रातः 5 बजे के बाद का है।

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